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कानपुर, 28 दिसंबर 2025: पूर्व छात्रों द्वारा संचालित परोपकार के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक क्षण को चिह्नित करते हुए, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के बैच ऑफ़ 2000 ने अपने सिल्वर जुबली रीयूनियन के दौरान अपने अल्मा मेटर के लिए ₹100 करोड़ के योगदान की घोषणा की। यह भारत के सभी शैक्षणिक संस्थानों में किसी भी बैच द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक योगदान है। यह सामूहिक प्रतिबद्धता आईआईटी कानपुर के प्रति बैच की गहरी कृतज्ञता और संस्थान के शैक्षणिक, शोध एवं सामाजिक प्रभाव को और सशक्त बनाने की साझा दृष्टि को दर्शाती है।
अपने अल्मा मेटर के लिए इस ऐतिहासिक ₹100 करोड़ के योगदान के माध्यम से, मिलेनियम क्लास आईआईटी कानपुर में ‘मिलेनियम स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी एंड सोसाइटी’ (MSTAS) की स्थापना को समर्थन देने का प्रस्ताव रखती है। यह घोषणा सिल्वर जुबली रीयूनियन समारोह का प्रमुख आकर्षण रही, जिसमें दुनिया भर से आए पूर्व छात्र परिसर, संकाय और एक-दूसरे से पुनः जुड़ने के साथ-साथ आईआईटी कानपुर के भविष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने के लिए एकत्र हुए। यह ऐतिहासिक योगदान, अंतःविषय शिक्षा और प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार में राष्ट्रीय एवं वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में आईआईटी कानपुर की भूमिका में बैच ऑफ़ 2000 के दृढ़ विश्वास को रेखांकित करता है। इस ऐतिहासिक मौके पर आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल ने कहा, “क्लास ऑफ़ 2000 द्वारा दिया गया ₹100 करोड़ का यह योगदान आईआईटी कानपुर और उसके पूर्व छात्रों के बीच के अटूट संबंध का सशक्त प्रमाण है। इस प्रकार का सहयोग न केवल हमारे शैक्षणिक और शोध पारितंत्र को मजबूत करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी उस संस्थान को कुछ लौटाने के लिए प्रेरित करता है जिसने उनके जीवन को आकार दिया है I" आईआईटी कानपुर के डीन ऑफ रिसोर्स एंड एलुमनाई, प्रो. अमेय करकरे ने कहा, “यह योगदान आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र समुदाय को परिभाषित करने वाली साझेदारी की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। क्लास ऑफ़ 2000 ने यह दर्शाया है कि पूर्व छात्रों की सक्रिय भागीदारी कैसे छात्रों, संकाय और समाज के लिए परिवर्तनकारी प्रभाव में बदल सकती है। उनके नेतृत्व और दूरदृष्टि के लिए हम अत्यंत आभारी हैं।” बैच की ओर से अपने विचार साझा करते हुए, क्लास ऑफ़ 2000 के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र श्री नवीन तिवारी ने कहा, “आईआईटी कानपुर ने हमें सिर्फ़ एक डिग्री नहीं दी—उसने हमें बड़े सपने देखने, धारणाओं पर प्रश्न उठाने और उद्देश्य के साथ निर्माण करने का साहस दिया। यह योगदान हमारी सामूहिक कृतज्ञता का प्रतीक है और यह सुनिश्चित करने का हमारा प्रयास है कि आने वाली पीढ़ियों को सीखने और नेतृत्व करने के समान, बल्कि उससे भी बेहतर अवसर मिलें।” बैच ऑफ़ 2000 के बैच समन्वयक श्री तमाल दास ने कहा, “सिल्वर जुबली रीयूनियन हम सभी के लिए गहरी यादों और आत्ममंथन का क्षण था। ₹100 करोड़ की सामूहिक प्रतिबद्धता हमारे साझा मूल्यों और आईआईटी कानपुर के साथ हमारे स्थायी जुड़ाव का प्रमाण है। हम अपने अल्मा मेटर के साथ मिलकर भविष्य के संस्थान-निर्माताओं को आकार देने की आशा करते हैं।” आईआईटी कानपुर के बारे में 1959 में स्थापित, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। विज्ञान और इंजीनियरिंग शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध, आईआईटी कानपुर ने अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसका 1,050 एकड़ का हरा-भरा परिसर शैक्षणिक और अनुसंधान संसाधनों से समृद्ध है। संस्थान में 20 विभाग, तीन अंतर्विषयी कार्यक्रम, 27 केंद्र और तीन विशेष स्कूल हैं, जो इंजीनियरिंग, विज्ञान, डिजाइन, मानविकी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को कवर करते हैं। 570 से अधिक पूर्णकालिक फैकल्टी और 9,500 से अधिक छात्रों के साथ, आईआईटी कानपुर नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता में अग्रणी बना हुआ है। |
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