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कानपुर, 9 फरवरी, 2026: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर की 1976 बैच अपने स्वर्ण जयंती पुनर्मिलन के अवसर पर परिसर में आई। इस अवसर पर उन्होंने अपनी संस्थान की शिक्षा पूर्ण किए 50 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया। इस पुनर्मिलन में भारत और विदेश से आए पूर्व छात्र शामिल हुए, जिन्होंने अपने साथियों से फिर से जुड़ कर पुरानी यादें ताज़ा कीं और अपनी मातृ संस्था के साथ अपने स्थायी संबंध को फिर से मजबूत किया।
स्वर्ण जयंती समारोह के अंतर्गत 1976 बैच ने आईआईटी कानपुर की विभिन्न महत्वपूर्ण पहलों के समर्थन हेतु 13.40 करोड़ रुपये देने का संकल्प घोषित किया। यह सामूहिक योगदान संस्थान के प्रति बैच की गहरी कृतज्ञता और आईआईटी कानपुर की निरंतर प्रगति और उत्कृष्टता में सार्थक योगदान देने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस पुनर्मिलन ने पूर्व छात्रों को संस्थान के नेतृत्व, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों के साथ संवाद का अवसर दिया। साथ ही उन्होंने पिछले पांच दशकों में आईआईटी कानपुर द्वारा हासिल की गई शैक्षणिक, अनुसंधान और अवसंरचनात्मक उपलब्धियों को भी निकट से देखा। पूर्व छात्रों ने 1970 के दशक में परिसर में बिताए अपने प्रारंभिक वर्षों को भावुकता से याद किया, जिसने उनके पेशेवर जीवन और मूल्यों की नींव रखी। इस अवसर पर आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा, “आईआईटी कानपुर अपने पूर्व छात्रों की उपलब्धियों और उनके द्वारा निभाए जा रहे मूल्यों पर गर्व करता है। 1976 बैच का स्वर्ण जयंती पुनर्मिलन केवल व्यक्तिगत और पेशेवर उपलब्धियों के पांच दशकों का उत्सव नहीं है, बल्कि संस्थान के साथ उनके स्थायी संबंध का भी प्रतीक है। संस्थान को सहयोग देने की उनकी प्रतिबद्धता भविष्य की पीढ़ियों के लिए आईआईटी कानपुर के शैक्षणिक और संस्थागत प्रणाली को और सशक्त बनाएगी।” बैच की ओर से श्री मुक्तेश पंत ने 1976 बैच की सामूहिक योगदान की दीर्घकालिक परम्परा और आईआईटी कानपुर के साथ उनके निरंतर जुड़ाव को रेखांकित किया। उन्होंने लगभग 25 वर्ष पहले बैच द्वारा किए गए एक योगदान को याद किया, जिसे संस्थान ने विवेकपूर्ण निवेश के माध्यम से बढ़ाया और बाद में LVAD परियोजना के लिए उपयोग किया गया। इससे आईआईटी कानपुर के गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी में कृत्रिम हृदय अनुसंधान के अग्रणी कार्य की नींव पड़ी। इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए, बैच ने स्वर्ण जयंती के लिए 10 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा, जबकि बैच अपेक्षाकृत छोटा है और कई सदस्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं। पूर्व छात्रों के सामूहिक प्रयास से यह लक्ष्य पार हो गया और कुल योगदान 13.40 करोड़ रुपये तक पहुंचा, जो संस्थान के प्रति उनकी गहरी कृतज्ञता और साझा जिम्मेदारी को दर्शाता है। पूर्व छात्रों की निरंतर भागीदारी की सराहना करते हुए, संसाधन एवं पूर्व छात्र डीन प्रो. अमेय करकरे ने कहा, “हमारे पूर्व छात्र आईआईटी कानपुर की सबसे बड़ी ताकतों में से हैं, और 1976 बैच अपनी मातृसंस्था के साथ आजीवन संबंध की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस ऐतिहासिक पुनर्मिलन के दौरान उनका उदार योगदान संस्थान के प्रति उनके स्नेह और जिम्मेदारी की भावना को दर्शाता है। ऐसा सहयोग विद्यार्थियों के अवसरों, संकाय उत्कृष्टता और संस्थागत विकास को और आगे बढ़ाने में सहायक होगा तथा युवा बैचों को भी संस्थान से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करेगा।” 1976 बैच का स्वर्ण जयंती पुनर्मिलन भावनाओं, मित्रता और सार्थक सहभागिता से परिपूर्ण रहा, जिसने एक प्रेरक विरासत का उत्सव मनाया। आईआईटी कानपुर 1976 बैच की प्रतिबद्धता के लिए आभार व्यक्त करता है और शिक्षा, अनुसंधान तथा नवाचार के अपने मिशन को आगे बढ़ाने में उनके निरंतर सहयोग की अपेक्षा करता है। आईआईटी कानपुर के बारे में 1959 में स्थापित, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। विज्ञान और इंजीनियरिंग शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध, IIT कानपुर ने अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसका 1,050 एकड़ का हरा-भरा परिसर शैक्षणिक और अनुसंधान संसाधनों से समृद्ध है। संस्थान में 20 विभाग, तीन अंतर्विषयी कार्यक्रम, 27 केंद्र और तीन विशेष स्कूल हैं, जो इंजीनियरिंग, विज्ञान, डिजाइन, मानविकी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को कवर करते हैं। 570 से अधिक पूर्णकालिक फैकल्टी और 9,500 से अधिक छात्रों के साथ, IIT कानपुर नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता में अग्रणी बना हुआ है। |
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