|
||||||
|
कानपुर, 17 फरवरी 2026: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के 1990 बैच के पूर्व छात्र अपने कोरल जुबली रीयूनियन के अवसर पर परिसर में लौटे, जो उनके स्नातक होने के 35 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। इस रीयूनियन में भारत और विदेशों से आए पूर्व छात्र शामिल हुए, जिन्होंने अपने सहपाठियों से पुनः मुलाकात की, कैंपस की यादों को ताजा किया और अपनी मातृ संस्था के साथ अपने संबंधों को फिर से सुदृढ़ किया।
कोरल जुबली समारोह के अंतर्गत 1990 बैच ने संस्थान की शैक्षणिक, शोध तथा छात्र-केंद्रित पहलों के समर्थन के लिए ₹13.2 करोड़ के सामूहिक योगदान की घोषणा की। यह प्रतिबद्धता बैच की गहरी कृतज्ञता और संस्थान के सतत विकास में सार्थक योगदान देने की उनकी दूरदर्शी सोच को दर्शाती है। रीयूनियन कार्यक्रम में पूर्व छात्रों ने संस्थान के नेतृत्व, संकाय सदस्यों और छात्रों के साथ संवाद किया। साथ ही शोध, नवाचार और अवसंरचना विकास से जुड़ी चल रही पहलों पर प्रस्तुतियां भी दी गईं। पूर्व छात्रों ने अपने छात्र जीवन के अनुभवों और संस्थान से प्राप्त शिक्षा के दीर्घकालिक प्रभावों को भी साझा किया। इस अवसर पर बोलते हुए, प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल (निदेशक, आईआईटी कानपुर) ने कहा, “संस्थान को 1990 बैच की उपलब्धियों और उनके निरंतर जुड़ाव पर अत्यंत गर्व है। उनका कोरल जुबली रीयूनियन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि संस्थान के प्रति उनके आजीवन संबंध और भविष्य के प्रति साझा जिम्मेदारी का सशक्त प्रतीक है। उनका उदार योगदान छात्रवृत्तियों को मजबूत करेगा, उच्च स्तरीय शोध को बढ़ावा देगा और संस्थागत विकास को गति देगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए नए अवसर निर्मित होंगे।” प्रो. अमेय करकरे (अधिष्ठाता, संसाधन एवं एलुमनाई, आईआईटी कानपुर) ने कहा, “1990 बैच संस्थान की सशक्त एलुमनाई संस्कृति का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर सामूहिक रूप से योगदान देने का उनका निर्णय कृतज्ञता और जिम्मेदारी दोनों को दर्शाता है। इस प्रकार का सहयोग हमें छात्रवृत्ति कार्यक्रमों का विस्तार करने, शोध हेतु एंडाउड चेयर्स स्थापित करने और दीर्घकालिक दृष्टि के अनुरूप अवसंरचना विकसित करने में सक्षम बनाता है।” बैच की ओर से अपने विचार व्यक्त करते हुए, श्री राजीव रंजन, बैच समन्वयक, 1990 बैच, ने बताया कि सिल्वर जुबली के समय दिया गया ₹70 लाख का योगदान बढ़कर ₹1.5 करोड़ हो चुका है और आज भी छात्रवृत्तियों को सहयोग प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि बैच ने अपना कोरल जुबली लक्ष्य ₹13 करोड़ भी पार कर लिया है। यह उपलब्धि केवल एक आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि संस्थान के प्रति सामूहिक आभार की अभिव्यक्ति है। नया योगदान छात्रवृत्तियों को और सुदृढ़ करेगा, विभिन्न विभागों में स्थापित एंडाउड चेयर्स के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा देगा तथा अवसंरचना विकास के लिए अनरिस्ट्रिक्टेड फंड उपलब्ध कराएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि 1990 बैच आने वाले दशकों तक संस्थान से सक्रिय रूप से जुड़ा रहेगा। कोरल जुबली रीयूनियन का समापन पुरानी यादों, आपसी सहयोग और नए संकल्प के साथ हुआ। संस्थान ने 1990 बैच के निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और शिक्षा, शोध तथा नवाचार के अपने मिशन को आगे बढ़ाने में उनकी दीर्घकालिक साझेदारी की अपेक्षा जताई। आईआईटी कानपुर के बारे में 1959 में स्थापित, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। विज्ञान और इंजीनियरिंग शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध, IIT कानपुर ने अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसका 1,050 एकड़ का हरा-भरा परिसर शैक्षणिक और अनुसंधान संसाधनों से समृद्ध है। संस्थान में 20 विभाग, तीन अंतर्विषयी कार्यक्रम, 27 केंद्र और तीन विशेष स्कूल हैं, जो इंजीनियरिंग, विज्ञान, डिजाइन, मानविकी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को कवर करते हैं। 570 से अधिक पूर्णकालिक फैकल्टी और 9,500 से अधिक छात्रों के साथ, IIT कानपुर नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता में अग्रणी बना हुआ है। |
|
|||||