GeodCon-26: भारत का पहला राष्ट्रीय जियोडेसी सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित
New Delhi/Kanpur , 17 March 2026
Source: Information and Media Outreach Cell, IIT Kanpur
नई दिल्ली/कानपुर, 17 मार्च 2026: भारत का पहला राष्ट्रीय जियोडेसी सम्मेलन GeodCon-26 हाल ही में नई दिल्ली स्थित भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी में आयोजित किया गया। यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों, देश के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और उद्योग से जुड़े पेशेवरों के बीच विचार साझा करने का एक महत्वपूर्ण मंच बना। सम्मेलन में जियोडेटिक और जियोस्पेशियल तकनीकों तथा उनके वास्तविक उपयोगों पर विशेष ध्यान दिया गया।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सहयोग से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर में स्थित नेशनल सेंटर फॉर जियोडेसी (NCG) ने देश के प्रमुख संस्थानों में जियोडेसी के छह क्षेत्रीय केंद्र (RCG) स्थापित किए हैं। इनमें अन्ना विश्वविद्यालय, चेन्नई; भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे; मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल; मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, प्रयागराज; भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएसएम) धनबाद; और भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुवनंतपुरम शामिल हैं। इन संस्थानों से मिलकर बना एनसीजी–आरसीजी (NCG-RCG) कंसोर्टियम का उद्देश्य देश में जियोडेसी अनुसंधान और क्षमता निर्माण को मजबूत करना है।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जियोडेसी जैसे विज्ञान के मूल क्षेत्रों का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। यह आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के साथ-साथ देश में बुनियादी ढांचे के विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने यह भी बताया कि जियोडेसी राष्ट्रीय जियोडेटिक रेफ्रन्स फ्रेम, गुरुत्वाकर्षण मॉडल और सटीक स्थान निर्धारण प्रणालियों के विकास में अहम भूमिका निभाती है।
उद्घाटन समारोह में कई अन्य प्रमुख अतिथि भी उपस्थित रहे, जिनमें पद्म श्री डॉ. वी. पी. डिमरी, सम्मेलन के संरक्षक; श्री हितेश कुमार एस. मकवाना, सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया; डॉ. मनोरंजन मोहंती, DST में एनजीपी डिवीजन के प्रमुख; और प्रो. ओंकार दीक्षित, GeodCon-26 के अध्यक्ष, एनसीजी के समन्वयक और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर शामिल थे।
सम्मेलन के पहले दिन DST के सचिव, प्रो. अभय करंदीकर, ने भी प्रेरक संबोधन दिया और देशहित में जियोडेसी अनुसंधान को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
GeodCon-26 को भारत की राष्ट्रीय मानचित्रण संस्था, सर्वे ऑफ इंडिया, का सहयोग मिला। इसके साथ ही उद्योग जगत से Trimble Inc और अन्य तकनीकी सहयोगी भी इस कार्यक्रम से जुड़े रहे। सम्मेलन में शोधकर्ता, शिक्षाविद, पेशेवर, नीति-निर्माता और उद्योग प्रतिनिधि एक साथ आए और जियोडेसी तथा उससे जुड़े क्षेत्रों में हो रही नई प्रगति को साझा किया।
इस कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई, जैसे राष्ट्रीय रेफ्रन्स फ्रेम, पृथ्वी की निगरानी, जीएनएसएस तकनीक, उपग्रह और जमीन आधारित अवलोकन, जियोइड और गुरुत्वाकर्षण मॉडल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड तकनीक का उपयोग, जलवायु परिवर्तन अध्ययन, प्राकृतिक आपदाएं, भूजल आकलन, जमीन के बदलाव की निगरानी और क्षमता निर्माण।
सम्मेलन में विशेषज्ञों द्वारा ट्यूटोरियल सत्र, तकनीकी शोध पत्र प्रस्तुतियां, पोस्टर प्रेजेंटेशन और एक विशेष पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। इन सत्रों ने ज्ञान साझा करने और आपसी सहयोग को बढ़ाने का अवसर दिया, जिससे शिक्षा और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में लंबे समय तक उपयोगी समाधान विकसित किए जा सकें।
इस तरह के संवाद और सहयोग के माध्यम से GeodCon-26 भारत में जियोडेसी के क्षेत्र को मजबूत बनाने और नवाचार को बढ़ावा देने का प्रयास करता है। यह सम्मेलन देश में जियोडेसी का एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है और नई पीढ़ी के वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं को प्रेरित करते हुए वैज्ञानिक प्रगति और समाज के विकास में योगदान देगा।
आईआईटी कानपुर के बारे में
1959 में स्थापित, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। विज्ञान और इंजीनियरिंग शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध, आईआईटी कानपुर ने अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसका 1,050 एकड़ का हरा-भरा परिसर शैक्षणिक और अनुसंधान संसाधनों से समृद्ध है। संस्थान में 20 विभाग, तीन अंतर्विषयी कार्यक्रम, 27 केंद्र और तीन विशेष स्कूल हैं, जो इंजीनियरिंग, विज्ञान, डिजाइन, मानविकी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को समाहित करते हैं। 570 से अधिक पूर्णकालिक फैकल्टी और 9,500 से अधिक छात्रों के साथ, आईआईटी कानपुर नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता में अग्रणी बना हुआ है।