आईआईटी कानपुर के दिव्यांगजन प्रकोष्ठ (सीडीएपी) ने मनाया वार्षिक दिवस 2025
Kanpur , 13 January 2026
Source: Information and Media Outreach Cell, IIT Kanpur
कानपुर, 10 जनवरी 2026: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी कानपुर) के दिव्यांगजन प्रकोष्ठ (Cell for Differently Abled Persons – CDAP) ने अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस (IDPD) 2025 के अवसर पर अपना वार्षिक दिवस सफलतापूर्वक आयोजित किया। इस कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों, पूर्व छात्रों और विशिष्ट अतिथियों ने भाग लेकर समावेशन, दृढ़ता और सशक्तिकरण का उत्सव मनाया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसे प्रो. ब्रज भूषण (उप निदेशक, आईआईटी कानपुर), डॉ. आल्मा चोपड़ा (मुख्य अतिथि), श्री विश्वा रंजन (कुलसचिव, आईआईटी कानपुर) और प्रो. अनुभव गोयल (प्रमुख, सीडीएपी) द्वारा संपन्न किया गया। यह अवसर एक समावेशी शैक्षणिक वातावरण के निर्माण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा।
इसके पश्चात उद्घाटन संबोधन में प्रो. ब्रज भूषण ने संस्थान में सुलभ भौतिक एवं मानसिक वातावरण विकसित करने हेतु किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने सीडीएपी की विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए दिव्यांग छात्रों के सहयोग और सशक्तिकरण के प्रति प्रकोष्ठ की निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराया।
विद्यालय की छात्राओं प्रथा तिवारी और सुप्रिया तिवारी द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण भूमिका-नाट्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस प्रस्तुति के माध्यम से सहानुभूति, समावेशन और सामाजिक जागरूकता का सशक्त संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में डॉ. आल्मा चोपड़ा द्वारा दिया गया प्रेरणादायक व्याख्यान विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने आत्म-विश्वास, निरंतर प्रयास और दिव्यांगजनों के लिए समावेशी शिक्षा एवं सामाजिक सहयोग के महत्व पर अपने विचार साझा किए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अद्वितीय होता है और दूसरों से तुलना करने से व्यक्ति की वास्तविक क्षमता और पहचान कम हो जाती है।
प्रो. गौधम और उनकी टीम ने सहायक प्रौद्योगिकी (असिस्टिव टेक्नोलॉजी) के क्षेत्र में अपने कार्यों को प्रस्तुत किया। उनका शोध मानव–कंप्यूटर अंतःक्रिया को बेहतर बनाने पर केंद्रित है, जिसमें सुलभ और समावेशी तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया गया है। उनका कार्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता, एआर/वीआर/एक्सआर, क्रिएटिव टेक्नोलॉजी, संगीत प्रौद्योगिकी, नई मीडिया और सहायक प्रणालियों जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है, जिसे CHI, UIST, ISMAR और NIME जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों एवं मान्यता प्राप्त जर्नलों में प्रस्तुत किया गया है।
पूर्व छात्र श्री गोरांक दुडेजा ने अपने छात्र जीवन और पेशेवर अनुभव साझा करते हुए छात्रों को आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत 3 दिसंबर 2025 को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के अवसर पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। इस प्रतियोगिता में कैंपस स्कूल, केंद्रीय विद्यालय और ऑपर्च्युनिटी स्कूल के छात्रों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान “सीडीएपी: वर्ष 2025 की प्रमुख उपलब्धियां” विषय पर एक प्रस्तुति दी गई, जिसमें बीते वर्ष की प्रमुख गतिविधियों, पहलों और उपलब्धियों को दर्शाया गया।
कार्यक्रम का औपचारिक समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जो डॉ. आल्मा चोपड़ा, प्रो. अनुभव गोयल, प्रो. सिद्धार्थ पांडा, प्रो. आशुतोष मोदी एवं अन्य संस्थान अधिकारियों की उपस्थिति में प्रस्तुत किया गया। अंत में ग्रुप फोटोग्राफी भी हुई, जिसने इस समावेशी और प्रेरणादायक आयोजन को यादगार बना दिया।
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IIT कानपुर के बारे में
1959 में स्थापित, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। विज्ञान और इंजीनियरिंग शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध, IIT कानपुर ने अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसका 1,050 एकड़ का हरा-भरा परिसर शैक्षणिक और अनुसंधान संसाधनों से समृद्ध है। संस्थान में 20 विभाग, तीन अंतर्विषयी कार्यक्रम, 27 केंद्र और तीन विशेष स्कूल हैं, जो इंजीनियरिंग, विज्ञान, डिजाइन, मानविकी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को कवर करते हैं। 570 से अधिक पूर्णकालिक फैकल्टी और 9,500 से अधिक छात्रों के साथ, IIT कानपुर नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता में अग्रणी बना हुआ है।