आईआईटी कानपुर प्रायोजित धनवृत्ति वेंचर्स को सेबी की मंजूरी, उत्तर प्रदेश में आईआईटी समर्थित वेंचर कैपिटल के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
Kanpur , 9 June 2026
Source: Information and Media Outreach Cell, IIT Kanpur
आईआईटी कानपुर द्वारा प्रायोजित पहला सेबी-पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) कानपुर और उत्तर प्रदेश में डीप-टेक नवाचारों के व्यावसायीकरण तथा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को नई गति देगा
कानपुर, 9 जून, 2026: आईआईटी कानपुर तथा उसके पूर्व छात्रों (एलुमनाई) द्वारा प्रायोजित वेंचर कैपिटल फंड धनवृत्ति वेंचर्स (Dhanavritti Ventures) ने आज भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) से कैटेगरी-I अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) के रूप में औपचारिक पंजीकरण प्राप्त करने की घोषणा की। यह उपलब्धि धनवृत्ति वेंचर्स को भारत के उन शुरुआती सेबी-पंजीकृत वेंचर कैपिटल फंडों में शामिल करती है जिन्हें किसी आईआईटी का प्रत्यक्ष संस्थागत समर्थन प्राप्त है, तथा यह उत्तर प्रदेश में अपनी तरह का पहला फंड है।
यह फंड आईआईटी कानपुर के अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र से उभरने वाले डीप-टेक स्टार्टअप्स में निवेश करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। इसका विशेष ध्यान उन्नत इंजीनियरिंग सामग्री, रक्षा प्रौद्योगिकी, जीवन विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जलवायु प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों पर रहेगा। धनवृत्ति वेंचर्स प्रारंभिक चरण के उद्यमों को पूंजी, परिचालन सहयोग तथा आईआईटी कानपुर की विश्वस्तरीय अनुसंधान सुविधाओं, संकाय विशेषज्ञता और व्यापक पूर्व छात्र नेटवर्क तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराएगा।
सेबी पंजीकरण प्राप्त करने की यह उपलब्धि कई वर्षों के प्रयासों का परिणाम है, जिसका उद्देश्य एक विश्वसनीय और संस्थागत रूप से संचालित निवेश मंच तैयार करना था, जो आईआईटी कानपुर की अनुसंधान उत्कृष्टता और उद्योग जगत के बीच की दूरी को कम कर सके। फंड का संचालन एक पेशेवर निवेश टीम द्वारा किया जाएगा तथा इसकी निगरानी एक स्वतंत्र निवेश समिति (Investment Committee) करेगी। सभी निवेश निर्णय कठोर तकनीकी और बाजार-आधारित मूल्यांकन के आधार पर लिए जाएंगे।
धनवृत्ति वेंचर्स के प्रबंध भागीदार एवं आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र अनुराग सिंह ने कहा,
"सेबी की यह मंजूरी कई वर्षों के उस प्रयास का परिणाम है जिसके माध्यम से हम उत्तर प्रदेश में कुछ ऐसा स्थापित करना चाहते थे जो पहले कभी अस्तित्व में नहीं था—एक ऐसा वेंचर फंड जिसे आईआईटी कानपुर का पूर्ण संस्थागत समर्थन प्राप्त हो, जो सर्वोच्च नियामकीय मानकों के अनुरूप संचालित हो और विशेष रूप से उन डीप-टेक उद्यमियों को समर्थन देने के लिए बनाया गया हो जिन्हें हमारा संस्थान तैयार करता है।धनवृत्ति वेंचर्स केवल एक फंड नहीं है। यह आईआईटी कानपुर की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है जिसके तहत संस्थान में विकसित उत्कृष्ट अनुसंधान को बाजार तक पहुंचाया जाए, रोजगार सृजित किए जाएं और ऐसी कंपनियां बनाई जाएं जो कानपुर और उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय एवं वैश्विक नवाचार मानचित्र पर स्थापित करें। एक पूर्व छात्र के रूप में यह उपलब्धि मेरे लिए अत्यंत व्यक्तिगत महत्व रखती है और मुझे गर्व है कि हमने आईआईटी कानपुर के नाम के अनुरूप एक मजबूत मंच तैयार किया है।"
फंड की निवेश रणनीति इस विश्वास पर आधारित है कि भारत की अगली पीढ़ी की वैश्विक प्रतिस्पर्धी कंपनियां स्वामित्वाधिकार प्राप्त (Proprietary) प्रौद्योगिकी पर आधारित होंगी। दशकों की अनुसंधान उत्कृष्टता और उद्योग एवं शासन में फैले 45,000 से अधिक पूर्व छात्रों के नेटवर्क के साथ आईआईटी कानपुर ऐसी कंपनियों की पहचान करने, उन्हें समर्थन देने और प्रारंभिक चरण से आगे बढ़ाने की विशिष्ट क्षमता रखता है।
यह फंड आईआईटी कानपुर के नवाचार और उद्यमिता तंत्र के साथ निकट सहयोग में कार्य करेगा, ताकि संस्थान और व्यापक कानपुर क्षेत्र से उभरने वाले सबसे संभावनाशील डीप-टेक स्टार्टअप्स की पहचान कर उन्हें आवश्यक सहयोग प्रदान किया जा सके।
आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने कहा,"आईआईटी कानपुर हमेशा से नई पहल और अग्रणी उपलब्धियों का संस्थान रहा है। धनवृत्ति वेंचर्स का सेबी-अनुमोदित एआईएफ के रूप में पंजीकरण भी ऐसी ही एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो संस्थान के विकसित होते मिशन को दर्शाती है। महान विश्वविद्यालय केवल ज्ञान का सृजन नहीं करते, बल्कि उस ज्ञान को ऐसे समाधानों में परिवर्तित करते हैं जो लोगों के जीवन को बेहतर बनाते हैं और अर्थव्यवस्था को गति देते हैं।कानपुर और उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में अपार संभावनाएं हैं और धनवृत्ति वेंचर्स उन्हें साकार करने के लिए एक संरचित एवं पेशेवर मंच प्रदान करेगा। मुझे विश्वास है कि यह फंड निवेशकों के लिए बेहतर प्रतिफल देने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश को भारत में डीप-टेक उद्यमिता के अग्रणी केंद्रों में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।"
उत्तर प्रदेश सरकार के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स तथा योजना एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग के प्रमुख सचिव एवं ‘1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ पहल तथा ‘जीरो पॉवर्टी यूपी अभियान’ के नोडल अधिकारी आलोक कुमार (आईएएस) ने कहा,"उत्तर प्रदेश एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ रहा है। यह लक्ष्य तभी साकार होगा जब हम डीप-टेक, नवाचार और उच्च-मूल्य रोजगार सृजन की मजबूत नींव तैयार करें। धनवृत्ति वेंचर्स को सेबी पंजीकरण मिलना ठीक उसी प्रकार का संस्थागत विकास है जिसकी हमारे राज्य को आवश्यकता है—एक पेशेवर रूप से संचालित, आईआईटी समर्थित फंड, जो गंभीर निवेश आकर्षित करेगा, उन्नत प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देगा और उत्तर प्रदेश में विश्वस्तरीय कंपनियों के निर्माण में सहायता करेगा।कानपुर पर फंड का विशेष ध्यान अत्यंत महत्वपूर्ण है। कानपुर के पास समृद्ध औद्योगिक विरासत, आईआईटी कानपुर जैसी शैक्षणिक उत्कृष्टता और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति है, जो इसे डीप-टेक उद्यमिता का राष्ट्रीय केंद्र बना सकती है। हम उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में धनवृत्ति वेंचर्स का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि इसके द्वारा समर्थित कंपनियां राज्य के परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।"
यह मंजूरी कानपुर और उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र पर व्यापक सकारात्मक प्रभाव डालने की क्षमता रखती है। अनुसंधान और प्रतिभा के स्रोत—अर्थात् विश्वविद्यालय परिसर—पर संस्थागत पूंजी को स्थापित करके धनवृत्ति वेंचर्स एक ऐसा चक्र विकसित करेगा जिसमें अनुसंधान से स्टार्टअप्स बनेंगे, स्टार्टअप्स को पूंजी और संरचित सहायता मिलेगी, तथा सफल कंपनियां पुनः प्रतिभा, पूंजी और विशेषज्ञता के रूप में पारिस्थितिकी तंत्र में निवेश करेंगी।
उत्तर प्रदेश पर फंड का विशेष ध्यान इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए निर्धारित किया गया है कि 24 करोड़ से अधिक आबादी, तेजी से बढ़ते औद्योगिक आधार और अवसंरचना में हो रहे निवेश के साथ यह राज्य प्रौद्योगिकी-आधारित विकास के लिए भारत के सबसे बड़े और अब तक कम उपयोग किए गए अवसरों में से एक है।
धनवृत्ति वेंचर्स के बारे में
धनवृत्ति वेंचर्स एकसेबी-पंजीकृत कैटेगरी-I अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) है, जिसे आईआईटी कानपुर द्वारा FIRST और SIIC के माध्यम से प्रायोजित किया गया है। यह फंड प्रारंभिक चरण के डीप-टेक स्टार्टअप्स में निवेश करता है, विशेष रूप से उन उद्यमों में जो आईआईटी कानपुर के अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र से उभरते हैं। FIRST और SIIC सहित आईआईटी कानपुर के नवाचार तंत्र के साथ निकट सहयोग के माध्यम से यह फंड उद्यमियों को पूंजी, संरचित मार्गदर्शन तथा संस्थागत सहयोग प्रदान करता है, ताकि वे भारत की अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी कंपनियों का निर्माण कर सकें।
आईआईटी कानपुर के बारे में
1959 में स्थापित, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। विज्ञान और इंजीनियरिंग शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध, आईआईटी कानपुर ने अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसका 1,050 एकड़ का हरा-भरा परिसर शैक्षणिक और अनुसंधान संसाधनों से समृद्ध है। संस्थान में 20 विभाग, तीन अंतर्विषयी कार्यक्रम, 27 केंद्र और तीन विशेष स्कूल हैं, जो इंजीनियरिंग, विज्ञान, डिजाइन, मानविकी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को समाहित करते हैं। 570 से अधिक पूर्णकालिक फैकल्टी और 9,500 से अधिक छात्रों के साथ, आईआईटी कानपुर नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता में अग्रणी बना हुआ है।
अधिक जानकारी के लिए विजिट करें: www.iitk.ac.in