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  • आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र श्री जगजीत सिंह बिंद्रा ने केमिकल इंजीनियरिंग अवसंरचना के लिए 11.5 लाख अमेरिकी डॉलर का योगदान दिया

आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र श्री जगजीत सिंह बिंद्रा ने केमिकल इंजीनियरिंग अवसंरचना के लिए 11.5 लाख अमेरिकी डॉलर का योगदान दिया

Alumnus Mr Jagjeet Singh Bindra

आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र श्री जगजीत सिंह बिंद्रा ने केमिकल इंजीनियरिंग अवसंरचना के लिए 11.5 लाख अमेरिकी डॉलर का योगदान दिया

Kanpur , 10 June 2026

Source: Information and Media Outreach Cell, IIT Kanpur

कानपुर, 10 जून, 2026: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी कानपुर) की अनुसंधान एवं शैक्षणिक अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, संस्थान के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र श्री जगजीत सिंह बिंद्रा (बीटी/सीएचई/1969) ने 11.5 लाख अमेरिकी डॉलर के उदार योगदान की घोषणा की है। इस सहयोग से आईआईटी कानपुर में एक नए केमिकल इंजीनियरिंग एनेक्स (Chemical Engineering Annex) की स्थापना की जाएगी।

आगामी भवन का नाम ‘जेनिस एवं जगजीत बिंद्रा केमिकल इंजीनियरिंग एनेक्स’ रखा जाएगा। यह सुविधा केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के लिए शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार का एक आधुनिक केंद्र होगी। लगभग 4,000 वर्गमीटर क्षेत्रफल में निर्मित यह अत्याधुनिक भवन विभाग की महत्वपूर्ण अवसंरचनात्मक आवश्यकताओं को पूरा करेगा तथा उसकी शैक्षणिक एवं अनुसंधान क्षमताओं के विस्तार में सहायक होगा।

इस नई सुविधा में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, स्मार्ट कक्षाएं, संकाय कार्यालय तथा सहयोगात्मक अनुसंधान स्थल स्थापित किए जाने की योजना है। यह भवन सतत प्रौद्योगिकियों, कम्प्यूटेशनल कैटालिसिस, जैव-प्रौद्योगिकी और उन्नत पदार्थों (एडवांस्ड मैटेरियल्स) जैसे उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा देगा। साथ ही, यह उद्योग-अकादमिक साझेदारी को सशक्त करेगा और अंतःविषय नवाचार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करेगा।

अपने योगदान के पीछे की प्रेरणा साझा करते हुए श्री जगजीत सिंह बिंद्रा ने कहा, “आईआईटी कानपुर से प्राप्त उत्कृष्ट शिक्षा ने मेरे पेशेवर करियर की नींव रखी है। यह मेरा सौभाग्य और सम्मान है कि मुझे संस्थान में अपने छोटे से योगदान का अवसर प्राप्त हुआ, ताकि आईआईटी कानपुर भविष्य के छात्र-विद्वानों के जीवन को निरंतर समृद्ध करता रहे।”

आईआईटी कानपुर का केमिकल इंजीनियरिंग विभाग, जो संस्थान के स्थापना-कालीन विभागों में से एक है, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में निरंतर अग्रणी रहा है। यह नया एनेक्स विभाग की उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करने तथा अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक सहयोग को आगे बढ़ाने की क्षमता को और मजबूत करेगा।

इस योगदान के लिए आभार व्यक्त करते हुए आईआईटी कानपुर के निदेशक, प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने कहा, “श्री बिंद्रा, IIT कानपुर के दीर्घकालिक योगदानकर्ताओं में से एक रहे हैं। IIT कानपुर के शैक्षणिक एवं अनुसंधान के विकास हेतु समर्थन के लिए हम उनके प्रति कृतज्ञ हैं। इस सुविधा की स्थापना IIT कानपुर में रासायनिक अभियांत्रिकी (केमिकल इंजीनियरिंग) के क्षेत्र में शिक्षा, नवाचार तथा अनुप्रयुक्त (ट्रांसलेशनल) अनुसंधान के लिए नए अवसरों का सृजन करेगी।”

आईआईटी कानपुर के संसाधन एवं पूर्व छात्र मामलों के अधिष्ठाता, अमेय करके ने कहा, “श्री बिंद्रा का IIT कानपुर के साथ निरंतर जुड़ाव अत्यंत प्रेरणादायक है। वर्षों से उनके योगदान ने संस्थान को महत्वपूर्ण रूप से सशक्त बनाया है, और यह नवीनतम प्रतिबद्धता उनके स्थायी विरासत को और भी दृढ़ करती है। ऐसे दीर्घकालिक सहयोगों के माध्यम से ही हम ऐसे संस्थान बना पाते हैं जो न केवल आज उत्कृष्टता प्राप्त करते हैं, बल्कि भविष्य में भी नेतृत्व करते हैं और प्रेरित करते हैं।”

आईआईटी कानपुर इस योगदान को औपचारिक रूप से मान्यता देते हुए इस सुविधा का नाम दानदाता के नाम पर रखेगा, जिससे उनकी विरासत संस्थान की शैक्षणिक संस्कृति का स्थायी हिस्सा बन जाएगी।

यह योगदान श्री बिंद्रा के आईआईटी कानपुर के साथ लंबे समय से जुड़े संबंधों को और मजबूत करता है। पिछले तीन दशकों में उन्होंने संस्थान की अनेक महत्वपूर्ण पहलों को सहयोग प्रदान किया है। इनमें ‘जीत बिंद्रा यूनिट ऑपरेशंस एंड इनोवेशन लैब’, ‘स्पेशलिटी केमिकल्स में जीत सिंह बिंद्रा उत्कृष्टता केंद्र’ सहित कई अवसंरचना विकास परियोजनाएं, अनुसंधान अनुदान, संकाय सहायता कार्यक्रम तथा छात्र-केंद्रित पहलें शामिल हैं। उनका यह निरंतर सहयोग न केवल उदारता का परिचायक है, बल्कि आईआईटी कानपुर में शिक्षा और अनुसंधान को दीर्घकालिक रूप से सशक्त बनाने की उनकी रणनीतिक दृष्टि को भी दर्शाता है।

श्री जगजीत सिंह बिंद्रा एक वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित उद्योग लीडर हैं। उन्होंने अपने पेशेवर जीवन में अनेक प्रमुख संगठनों में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाई हैं तथा ल्योंडेलबासेल , लार्सन एंड टुब्रो, एडिसन इंटरनेशनल, ट्रांसओशियन (Transocean) और वर्ली जैसी वैश्विक कंपनियों के निदेशक मंडलों में भी योगदान दिया है। उनकी पेशेवर उपलब्धियां और परोपकारी योगदान, दोनों ही इंजीनियरिंग शिक्षा और नवाचार को आगे बढ़ाने के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

आईआईटी कानपुर श्री बिंद्रा के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता है और आशा करता है कि यह पहल आने वाली पीढ़ियों के छात्रों, शोधकर्ताओं और संकाय सदस्यों के लिए परिवर्तनकारी प्रभाव उत्पन्न करेगी।

आईआईटी कानपुर के बारे में

1959 में स्थापित, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। विज्ञान और इंजीनियरिंग शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध, आईआईटी कानपुर ने अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसका 1,050 एकड़ का हरा-भरा परिसर शैक्षणिक और अनुसंधान संसाधनों से समृद्ध है। संस्थान में 20 विभाग, तीन अंतर्विषयी कार्यक्रम, 27 केंद्र और तीन विशेष स्कूल हैं, जो इंजीनियरिंग, विज्ञान, डिजाइन, मानविकी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को समाहित करते हैं। 570 से अधिक पूर्णकालिक फैकल्टी और 9,500 से अधिक छात्रों के साथ, आईआईटी कानपुर नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता में अग्रणी बना हुआ है।

अधिक जानकारी के लिए विजिट करें: www.iitk.ac.in