सतत कृषि को तकनीक के सहयोग से बढ़ावा देने के लिए आईआईटी कानपुर में अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू
Kanpur , 9 October 2026
Source: Information and Media Outreach Cell, IIT Kanpur
कानपुर, 09 अक्टूबर 2026: आईआईटी कानपुर ने सतत कृषि को बढ़ावा देने में आधुनिक तकनीक और डेटा के उपयोग पर केंद्रित अपने 5वें वार्षिक अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। “कृषि में सेंसरों के समन्वित उपयोग और डेटा विश्लेषण के माध्यम से टिकाऊपन के मानकों का निर्धारण” शीर्षक वाला यह कार्यक्रम 7 से 16 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।
वर्ष 2022 में शुरू हुई इस पहल के तहत अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी कृषि में स्थिरता का आकलन करने के लिए डेटा और आधुनिक तकनीकी तरीकों के उपयोग को समझ रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य उन्हें सतत और तकनीक आधारित कृषि के लिए आवश्यक विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कौशल प्रदान करना है।
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रो. सत्यकी रॉय हेड, डिज़ाइन विभाग, आईआईटी कानपुर की अगुवाई में हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. जे. रामकुमार, मैकेनिकल इंजीनियरिंग एवं डिज़ाइन विभाग तथा डॉ. अमनदीप सिंह ओबेरॉय, SREO इमैजिनियरिंग लैब भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में सतत कृषि को आगे बढ़ाने में तकनीक, डिज़ाइन और जानकारी साझा करने की भूमिका पर ज़ोर दिया गया। प्रो. सत्यकी रॉय ने कृषि क्षेत्र में मानव-केंद्रित और तकनीक आधारित समाधान विकसित करने की ज़रूरत बताई। उन्होंने NPTEL के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा और ज्ञान को संस्थानों और भौगोलिक सीमाओं से आगे पहुंचाने के महत्व को भी रेखांकित किया। साथ ही, उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के बेहतर उपयोग और कृषि की दीर्घकालिक मजबूती के लिए जैविक खेती और सतत कृषि करने की पद्धतियों के महत्व पर ज़ोर दिया।
यह कार्यक्रम आईआईटी कानपुर और अफ़्रीकी-एशियाई ग्रामीण विकास संगठन (AARDO) के बीच करीब पांच वर्षों से जारी साझेदारी को भी आगे बढ़ाता है। इस सहयोग के माध्यम से AARDO के सदस्य देशों के प्रतिभागियों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और संस्थागत ज्ञान साझा करने के मौके उपलब्ध हो रहा हैं। प्रो. जे. रामकुमार ने इस निरंतर सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।
प्रशिक्षण के दौरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों को आईआईटी कानपुर में विकसित तकनीकों और नवाचारों से भी परिचित कराया जा रहा है। इसके लिए विशेषज्ञ व्याख्यान, उपकरणों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन और डेटा एनालिटिक्स से जुड़े व्यावहारिक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। डॉ. अमनदीप सिंह ओबेरॉय ने बताया कि इन गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को सतत और तकनीक आधारित कृषि के लिए आवश्यक विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कौशल विकसित करने में मदद मिल रही है।
कार्यक्रम के दौरान प्रो. बुशरा अतीक, डीन, अंतरराष्ट्रीय संबंध, आईआईटी कानपुर भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों से संवाद करेंगी। उनकी भागीदारी से शैक्षणिक जुड़ाव, संस्थागत सहयोग और जानकारी साझा करने को और मजबूत करने पर ज़ोर रहेगा।
आईआईटी कानपुर के बारे में
1959 में स्थापित, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। विज्ञान और इंजीनियरिंग शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध, आईआईटी कानपुर ने अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसका 1,050 एकड़ का हरा-भरा परिसर शैक्षणिक और अनुसंधान संसाधनों से समृद्ध है। संस्थान में 20 विभाग, 27 केंद्र, तीन अंतर्विषयी कार्यक्रम और तीन विशेष स्कूल हैं, जो इंजीनियरिंग, विज्ञान, डिजाइन, मानविकी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को समाहित करते हैं। 570 से अधिक पूर्णकालिक फैकल्टी और 9,500 से अधिक छात्रों के साथ, आईआईटी कानपुर नवाचार, अनुसंधान और समग्र विकास में अग्रणी बना हुआ है।
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