वाधवानी–आईआईटी कानपुर इनोवेशन सेंटर का शुभारंभ, लाइफ साइंसेज और मेडिकल टेक्नोलॉजी में अनुसंधान को बाजार तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
Kanpur , 17 September 2026
Source: Information and Media Outreach Cell, IIT Kanpur
~ सेंटर को पांच वर्षों में 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता मिलेगी, जिससे अनुसंधान को स्वास्थ्य क्षेत्र की तकनीकों, उत्पादों और समाधानों में बदलने में मिलेगी मदद
कानपुर, 17 सितंबर 2026: स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए अनुसंधान को उत्पादों और समाधानों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए, आईआईटी कानपुर में वाधवानी इनोवेशन सेंटर फॉर लाइफ साइंसेज एंड मेडिकल टेक्नोलॉजीज की स्थापना की गई। यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के रूप में कार्य करेगा। सेंटर को पांच वर्षों में 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता मिलेगी। इससे लाइफ साइंसेज, बायोटेक्नोलॉजी, मेडिकल टेक्नोलॉजी और एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में संभावनाशील नवाचारों के विकास, परीक्षण और व्यावसायीकरण में मदद मिलेगी।
सेंटर का शुभारंभ डॉ. उपेंद्र कुमार सिंह, महानिदेशक, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), नई दिल्ली की उपस्थिति में हुआ।
यह नया सेंटर थेरेप्यूटिक्स, रीजनरेटिव मेडिसिन और ड्रग डिलीवरी से लेकर वैक्सीन, मेडिकल डिवाइस और डायग्नोस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में उच्च क्षमता वाले अनुसंधान को सहयोग प्रदान करेगा। इसके साथ ही, न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों, मानसिक स्वास्थ्य, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस और एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं जैसे उभरते क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जाएगा। आईआईटी कानपुर की अनुसंधान क्षमताओं का लाभ उठाते हुए यह सेंटर प्रयोगशाला में विकसित संभावनाशील विचारों को वास्तविक स्वास्थ्य सेवाओं में उपयोग होने वाले उत्पादों और समाधानों में बदलने में मदद करेगा। इसके तहत शोधकर्ताओं को वैलिडेशन, बौद्धिक संपदा (IP) और नियामक प्रक्रियाओं में सहयोग दिया जाएगा तथा उन्हें तकनीक हस्तांतरण और व्यावसायीकरण के लिए उद्योग जगत से जोड़ने में मदद की जाएगी।
सेंटर के शुभारंभ के अवसर पर प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल, निदेशक, आईआईटी कानपुर ने कहा, “आईआईटी कानपुर में वाधवानी चैरिटेबल फाउंडेशन के सहयोग से वाधवानी इनोवेशन नेटवर्क–सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (WIN-CoE) की स्थापना का स्वागत है। आईआईटी कानपुर में रीजनरेटिव मेडिसिन, मॉलिक्यूलर मेडिसिन, न्यूरोसाइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित बायोमेडिकल रिसर्च का एक मजबूत इकोसिस्टम है। स्वास्थ्य के उभरते क्षेत्रों में भी संस्थान अत्याधुनिक अनुसंधान कर रहा है। WIN-CoE इस कार्य को आगे बढ़ाते हुए तकनीक के विकास और हस्तांतरण, उद्यमिता और व्यावसायीकरण के माध्यम से संभावनाशील अनुसंधान को उत्पादों में बदलने में सहायक होगा।”
डॉ. शिरशेंदु मुखर्जी, मैनेजिंग डायरेक्टर, वाधवानी इनोवेशन नेटवर्क ने कहा, “भारत में उत्कृष्ट और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अनुसंधान की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि प्रयोगशाला में किए गए अनुसंधान को बाजार तक पहुंचाने के लिए मजबूत व्यवस्था विकसित की जाए। WIN के माध्यम से हम शोधकर्ताओं को आवश्यक विशेषज्ञता, उद्योग जगत के साथ साझेदारी, पूंजी और व्यावसायीकरण
से जुड़ी सहायता उपलब्ध करा रहे हैं, ताकि अनुसंधान को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचाया जा सके। वाधवानी–आईआईटी कानपुर इनोवेशन सेंटर–लाइफ साइंसेज भारत में इस क्षमता को बड़े स्तर पर विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
प्रो. अशोक कुमार, प्रोफेसर, बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी कानपुर एवं प्रोफेसर इन-चार्ज, WIN-CoE, आईआईटी कानपुर ने कहा, “आईआईटी कानपुर में हमने हमेशा विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उत्कृष्टता को महत्व दिया है। WIN-CoE इस प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाने और एक ऐसा वातावरण तैयार करने का अवसर प्रदान करता है, जहां संभावनाशील विचारों को प्रयोगशाला की सीमाओं से आगे विकसित किया जा सके। WIN-CoE के माध्यम से हमारा प्रयास है कि शोधकर्ता केवल वैज्ञानिक खोजों पर ही नहीं, बल्कि उन जरूरतों, चुनौतियों और उपयोगों पर भी ध्यान दें, जो किसी नवाचार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।”
प्रो. संतोष मिश्रा, एसोसिएट प्रोफेसर, बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी कानपुर एवं को-प्रोफेसर इन-चार्ज, WIN-CoE, आईआईटी कानपुर ने कहा, “लंबे समय से मेड-टेक में नवाचार मुख्य रूप से प्रयोगशाला में किए जाने वाले अनुसंधान पर आधारित रहे हैं। आईआईटी कानपुर अब चिकित्सकीय जरूरतों की पहचान कर उन्हें अपने इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की विशेषज्ञता से जोड़कर इस अंतर को कम करने की दिशा में काम कर रहा है। चिकित्सकीय जरूरतों, इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीकों को एक साथ लाकर WIN-CoE इस प्रयास को और मजबूत करेगा तथा अनुसंधान को बाजार के लिए तैयार बायोमेडिकल उत्पादों और चिकित्सा समाधानों में बदलने में मदद करेगा।”
शुभारंभ के बाद ‘ट्रांसलेशनल रिसर्च एंड रेगुलेटरी पाथवेज: ब्रिजिंग इनोवेशन टू हेल्थकेयर इम्पैक्ट’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें नियामक एजेंसियों, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य क्षेत्र, उद्योग और नवाचार से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में प्रयोगशाला में विकसित नवाचार को क्लिनिकल वैलिडेशन और नियामकीय मंजूरी की प्रक्रिया से आगे बढ़ाते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में उपयोग तक पहुंचाने के विभिन्न चरणों पर चर्चा की गई।
वाधवानी–आईआईटी कानपुर इनोवेशन सेंटर, वाधवानी फाउंडेशन की भारत में प्रमुख नवाचार पहल वाधवानी इनोवेशन नेटवर्क (WIN) का हिस्सा है। WIN देशभर में इनोवेशन सेंटर का एक राष्ट्रीय नेटवर्क विकसित कर रहा है, जिसका उद्देश्य अनुसंधान को व्यावहारिक उपयोग और व्यावसायीकरण तक पहुंचाने की प्रक्रिया को मजबूत करना है।
आईआईटी कानपुर के बारे में
1959 में स्थापित, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। विज्ञान और इंजीनियरिंग शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध, आईआईटी कानपुर ने अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसका 1,050 एकड़ का हरा-भरा परिसर शैक्षणिक और अनुसंधान संसाधनों से समृद्ध है। संस्थान में 21 विभाग, तीन अंतर्विषयी कार्यक्रम, 27 केंद्र और तीन विशेष स्कूल हैं, जो इंजीनियरिंग, विज्ञान, डिजाइन, मानविकी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को समाहित करते हैं। 590 से अधिक पूर्णकालिक फैकल्टी और 9,500 से अधिक छात्रों के साथ, आईआईटी कानपुर नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता में अग्रणी बना हुआ है।
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