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भा.प्रौ.सं.कानपुर
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  • आईआईटी कानपुर ने ‘समन्वय 2026’ के तीसरे संस्करण का सफलतापूर्वक किया समापन; अकादमिक जगत और उद्योग के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने तथा अनुसंधान-आधारित नवाचार को बढ़ावा देने पर रहा विशेष जोर

आईआईटी कानपुर ने ‘समन्वय 2026’ के तीसरे संस्करण का सफलतापूर्वक किया समापन; अकादमिक जगत और उद्योग के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने तथा अनुसंधान-आधारित नवाचार को बढ़ावा देने पर रहा विशेष जोर

Samanvay 2026

आईआईटी कानपुर ने ‘समन्वय 2026’ के तीसरे संस्करण का सफलतापूर्वक किया समापन; अकादमिक जगत और उद्योग के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने तथा अनुसंधान-आधारित नवाचार को बढ़ावा देने पर रहा विशेष जोर

New Delhi , 16 October 2026

Source: Information and Media Outreach Cell, IIT Kanpur

~ डॉ. जितेंद्र सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में की शिरकत

~ आईआईटी कानपुर और गेट्स फाउंडेशन ने स्थानीय स्तर पर विकसित, किफायती डायग्नोस्टिक समाधानों को आगे बढ़ाने के लिए साझेदारी की घोषणा की

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026: " भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी कानपुर) ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में अपने प्रमुख उद्योग-अकादमिक एवं नवाचार सम्मेलन, आईआईटीके समन्वय 2026 (IITK Samanvay 2026) के तीसरे संस्करण का सफलतापूर्वक समापन किया। इस सम्मेलन में उद्योग, सरकार और अकादमिक जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा आपसी सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करते हुए अनुसंधान-आधारित नवाचार को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।

इस अवसर पर आईआईटी कानपुर और गेट्स फाउंडेशन के बीच एक महत्वपूर्ण साझेदारी की घोषणा भी की गई। इस साझेदारी का उद्देश्य भारत के विज्ञान एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए स्थानीय स्तर पर विकसित और किफायती नैदानिक समाधानों (डायग्नोस्टिक्स) को आगे बढ़ाना है। इस साझेदारी की घोषणा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के माननीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में की गई, जो सम्मेलन के मुख्य अतिथि भी थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के माननीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा , “ समन्वय आईआईटी कानपुर की एक उत्कृष्ट पहल है। अकादमिक जगत , अनुसंधान और उद्योग सहित सभी हितधारकों को एक साझा मंच पर लाने का यह सराहनीय प्रयास है। यदि अगली औद्योगिक क्रांति जैव प्रौद्योगिकी , क्वांटम प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से संचालित होनी है , तो भारत पहले से ही इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि , इस प्रगति को प्रयोगशाला से धरातल तक और प्रोटोटाइप से वास्तविक उत्पाद तक पहुंचाने के लिए दीर्घकालिक साझेदारियों की आवश्यकता है। विकसित भारत 2047 की दिशा में हमारी यात्रा में समन्वय जैसे मंच महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।”

उद्योग के साथ संस्थान के निरंतर जुड़ाव तथा अनुसंधान और नवाचार के अवसरों के सृजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा , “ शैक्षणिक संस्थानों का एक प्रमुख दायित्व वैज्ञानिक ज्ञान को ऐसे समाधानों में परिवर्तित करना है , जो लोगों के जीवन को बेहतर बना सकें। आईआईटी कानपुर में हम एक ऐसे नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं , जो अनुसंधान , उद्यमिता और उद्योग को जोड़कर राष्ट्रीय एवं वैश्विक महत्व की चुनौतियों का समाधान कर सके। गेट्स फाउंडेशन के साथ हमारी साझेदारी इसी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। विशेष रूप से , स्थानीय स्तर पर विकसित किफायती नैदानिक समाधानों को आगे बढ़ाने के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। समन्वय जैसी पहलों के जरिए हमारा उद्देश्य ऐसे सहयोग को बढ़ावा देना है , जो संभावनाओं से परिपूर्ण विचारों को प्रयोगशालाओं से बाहर निकालकर उन समुदायों तक पहुंचाए , जिन्हें इनका सबसे अधिक लाभ मिल सकता है।”

आईआईटी कानपुर के साथ साझेदारी पर गेट्स फाउंडेशन की इंडिया कंट्री डायरेक्टर अर्चना व्यास ने कहा , “ भारत की वैज्ञानिक प्रतिभा , इंजीनियरिंग में उत्कृष्टता और विनिर्माण क्षमताएं देश तथा ग्लोबल साउथ के अन्य देशों में किफायती एवं उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। आईआईटी कानपुर के साथ हमारी साझेदारी इंजीनियरिंग , जैव प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को एक साथ लाकर वंचित एवं सुविधाओं से वंचित समुदायों के लिए अधिक तेज और सुलभ नैदानिक समाधानों की संभावनाओं का पता लगाती है। भारत की स्वदेशी अनुसंधान एवं नवाचार क्षमताओं को मजबूत करके हमारा उद्देश्य संभावनाशील वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावहारिक स्वास्थ्य समाधानों में परिवर्तित करना तथा अधिक सुदृढ़ और आत्मनिर्भर स्वास्थ्य नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में सहयोग देना है।”

सम्मेलन में मुख्य वक्तव्य मिरिक गोगरी , प्रमुख—कॉरपोरेट रणनीति , आरती इंडस्ट्रीज ; प्रिंसिपल , स्पेक्ट्रम इम्पैक्ट ; तथा इंडिया ट्रांसलेशनल रिसर्च इनिशिएटिव ( ITRI) के संस्थापक ने दिया। उनके वक्तव्य ने इस चर्चा की दिशा निर्धारित की कि अनुसंधान और नवाचार भारत के भविष्य के निर्माण में किस प्रकार योगदान दे सकते हैं।

इसके बाद ‘भारत के नवाचार भविष्य को आकार देने वाली उभरती प्रौद्योगिकियां’ विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई। सम्मेलन में अन्य चर्चाओं के अंतर्गत ‘भारत के लिए स्वास्थ्य सेवा में नवाचार’ तथा ‘बेहतर समाज के लिए प्रौद्योगिकी और अनुसंधान का उपयोग’ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

सम्मेलन में आईआईटी कानपुर के प्रोफेसरों द्वारा तीन विशेषज्ञ व्याख्यान भी प्रस्तुत किए गए। गोल्डमैन सैक्स सस्टेनेबिलिटी चेयर प्रोफेसर प्रो. तरुण गुप्ता ने ‘भारत के विकास के निर्णायक दशक के लिए नवाचार’ विषय पर व्याख्यान दिया।

गैंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. अनिल के. ललवानी ने ‘समावेशी स्वास्थ्य सेवा का भविष्य’ विषय पर अपने विचार साझा किए। वहीं , कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी के डीन प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी ने ‘अनुसंधान से वास्तविक दुनिया में प्रभाव तक सहयोग’ विषय पर व्याख्यान दिया।

प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी में 21 प्रदर्शकों ने भाग लिया। इनमें एंड्योरएयर ( EndureAir), वाधवानी स्कूल ऑफ एआई एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स , सी 3 आई हब , अनंत सिस्टम्स , गैंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी , क्यूराडेव ( CURADEV), क्यूट ब्रेन्स प्राइवेट लिमिटेड , कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी , ऑफग्रिड ( Offgrid), स्कैननेक्स्ट ( SCANXT), एयरावत रिसर्च फाउंडेशन और ब्रह्मियन स्पेसटेक सहित अन्य संस्थान एवं कंपनियां शामिल थीं।

प्रदर्शनी में प्रस्तुत नवाचारों में एयरोस्पेस , उन्नत सामग्री , कृत्रिम बुद्धिमत्ता , साइबर सुरक्षा , सस्टेनेबल एनर्जी , चिकित्सा प्रौद्योगिकी , रोबोटिक्स और प्रिसिजन एग्रीकल्चर जैसे विविध क्षेत्र शामिल रहे। इन नवाचारों ने आईआईटी कानपुर के अनुसंधान एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की व्यापकता और विविधता को प्रदर्शित किया।

समन्वय के माध्यम से आईआईटी कानपुर उद्योग जगत के साथ अपने संबंधों को लगातार मजबूत कर रहा है तथा सहयोग के नए अवसर सृजित कर रहा है। इससे अनुसंधान को वास्तविक दुनिया की आवश्यकताओं के और करीब लाने में मदद मिल रही है। यह उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार को आगे बढ़ाने के संस्थान के व्यापक दृष्टिकोण को भी प्रतिबिंबित करता है।

इसी दृष्टिकोण के तहत आईआईटी कानपुर ने 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में अपने ‘ग्रेटर दैन अस’ ( Greater Than Us) अभियान का शुभारंभ किया। इस अभियान का लक्ष्य मार्च 2029 तक 1 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाना है। इसके माध्यम से संस्थान की बुनियादी क्षमताओं को सुदृढ़ करने , प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और अत्याधुनिक अनुसंधान एवं नवाचार को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

आईआईटी कानपुर के बारे में

1959 में स्थापित, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। विज्ञान और इंजीनियरिंग शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध, आईआईटी कानपुर ने अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसका 1,050 एकड़ का हरा-भरा परिसर शैक्षणिक और अनुसंधान संसाधनों से समृद्ध है। संस्थान में 21 विभाग, 27 केंद्र, तीन अंतर्विषयी कार्यक्रम और तीन विशेष स्कूल हैं, जो इंजीनियरिंग, विज्ञान, डिजाइन, मानविकी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को समाहित करते हैं। 580 से अधिक पूर्णकालिक फैकल्टी और 9,500 से अधिक छात्रों के साथ, आईआईटी कानपुर नवाचार, अनुसंधान और समग्र विकास में अग्रणी बना हुआ है।

अधिक जानकारी के लिए विज़िट करें: www.iitk.ac.in