आईआईटी कानपुर ने शुरू किया ‘ग्रेटर दैन अस’ अभियान, 1 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाने का लक्ष्य; अब तक ₹4,155 करोड़ की प्रतिबद्धता
New Delhi , 15 October 2026
Source: Information and Media Outreach Cell, IIT Kanpur
- माननीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया अभियान का शुभारंभ
- आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र राहुल गौतम ने गौतम स्कूल ऑफ इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप की स्थापना के लिए ₹180 करोड़ देने की प्रतिबद्धता जताई
- फाउंडेशन, टैलेंट और फ्रंटियर के तीन स्तंभों पर आधारित यह अभियान भारत की अगली पीढ़ी को राष्ट्र के भविष्य के निर्माण के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी कानपुर) ने आज ‘ग्रेटर दैन अस’ (Greater Than Us) अभियान का शुभारंभ किया। मार्च 2029 तक 1 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाने के लक्ष्य वाला यह अभियान किसी भी आईआईटी द्वारा शुरू किया गया अब तक का सबसे बड़ा धन-संग्रह अभियान है। अभियान के कुल लक्ष्य का लगभग आधा हिस्सा, यानी ₹4,155 करोड़, पूर्व छात्रों, दानदाताओं, कॉरपोरेट भागीदारों और सरकार की ओर से पहले ही प्रतिबद्ध किया जा चुका है। इस अभियान का शुभारंभ माननीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में किया।

इस स्तर के अभियान का लक्ष्य अब तक किसी अन्य आईआईटी ने नहीं रखा है। आईआईटी कानपुर की छह दशकों से अधिक की गौरवशाली विरासत पर आधारित ‘ग्रेटर दैन अस’ अभियान का उद्देश्य पूर्व छात्रों, दानदाताओं, उद्योग जगत और संस्थागत भागीदारों को एक साझा मंच पर लाकर संस्थान की बुनियादी सुविधाओं तथा युवा प्रतिभाओं में निवेश करना है। इसका लक्ष्य ऐसे शोधकर्ताओं, नवोन्मेषकों और उद्यमियों को सक्षम बनाना है, जो विकसित भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप नई खोजें करेंगे, अत्याधुनिक तकनीक विकसित करेंगे और नई कंपनियों की स्थापना करेंगे।
अभियान के शुभारंभ के अवसर पर आईआईटी कानपुर ने अपने पूर्व छात्र राहुल गौतम के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। श्री गौतम ने संस्थान के नोएडा परिसर में गौतम स्कूल ऑफ इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (G-SINE) की स्थापना के लिए ₹180 करोड़ देने की प्रतिबद्धता जताई है।
जी-साइन का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा, डिजिटल स्वास्थ्य, जैव प्रौद्योगिकी, ड्रोन और उन्नत विनिर्माण जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित उद्यमियों और नेतृत्वकर्ताओं की नई पीढ़ी तैयार करना है। इस स्कूल में पूर्णकालिक संकाय और डिग्री कार्यक्रम होंगे। इसकी शुरुआत जुलाई 2027 में प्रौद्योगिकी एवं उद्यमिता में एमबीए (MBA in Technology & Entrepreneurship) के प्रमुख कार्यक्रम के साथ प्रस्तावित है।
नोएडा परिसर में प्रस्तावित डीप टेक हब के साथ मिलकर जी-साइन विद्यार्थियों को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी सुविधाओं तक पहुंच प्रदान करेगा, जिससे वे शोध को व्यावहारिक उत्पादों में बदल सकेंगे। इस पहल को आईआईटी कानपुर के स्टार्टअप इनक्यूबेटर, स्टार्टअप इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेंटर (SIIC), का भी सहयोग मिलेगा, जिसके अंतर्गत अब तक 571 स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट किया जा चुका है।
तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित अभियान
‘ग्रेटर दैन अस’ अभियान तीन प्रमुख स्तंभों—फाउंडेशन (Foundation), टैलेंट (Talent) और फ्रंटियर (Frontier)—पर आधारित है।
- फाउंडेशन: अनुसंधान एवं संस्थागत बुनियादी ढांचे को सशक्त बनाना
₹5,000 करोड़ के लक्ष्य वाला फाउंडेशन स्तंभ आईआईटी कानपुर के विकास के अगले चरण के लिए अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं और संस्थागत बुनियादी ढांचे के निर्माण पर केंद्रित है।
इसका प्रमुख हिस्सा ₹524 करोड़ की लागत से विकसित की जा रही केंद्रीय अनुसंधान सुविधा (Central Research Facility) है। इसके माध्यम से शोधकर्ताओं को उच्चस्तरीय वैज्ञानिक उपकरणों और साझा अनुसंधान सुविधाओं तक पहुंच मिलेगी। इसमें ₹160 करोड़ की लागत वाला सेमीकंडक्टर एवं डिवाइस प्रोसेसिंग केंद्र शामिल है, जिसमें क्लीन रूम की सुविधा होगी। इसके अतिरिक्त, उन्नत स्पेक्ट्रोस्कोपी और माइक्रोस्कोपी केंद्र भी विकसित किए जाएंगे।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और वैज्ञानिक सिमुलेशन जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को गति देने के लिए उन्नत ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) से युक्त ₹200 करोड़ की उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (High-Performance Computing) सुविधा स्थापित की जाएगी।
परिसर में प्रत्येक 1,000 विद्यार्थियों की क्षमता वाले चार नए छात्रावासों का निर्माण भी जारी है। इनमें से पहला छात्रावास जून 2027 तक तैयार होने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, 96 नए संकाय आवास और मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (Centre for Mental Health & Wellbeing) भी विकसित किए जा रहे हैं।
- टैलेंट: प्रतिभाओं और भावी नेतृत्वकर्ताओं में निवेश
₹3,000 करोड़ के लक्ष्य वाला टैलेंट स्तंभ प्रतिभाशाली विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, नवोन्मेषकों, उद्यमियों और भावी नेतृत्वकर्ताओं को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।
इस पहल के तहत छात्रवृत्तियों और अधिक संख्या में डॉक्टरेट फेलोशिप के माध्यम से विद्यार्थियों को सहायता प्रदान की जाएगी। इसका उद्देश्य प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ना है। इसके साथ ही, फैकल्टी चेयर्स, युवा संकाय फेलोशिप और ग्लोबल विजिटिंग फैकल्टी कार्यक्रम के माध्यम से उत्कृष्ट शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।
आईआईटी कानपुर ने इस दिशा में पहले ही कई नए कदम उठाए हैं। इनमें गंगवाल स्कूल में पहली बार अपनाई गई मार्केट-लिंक्ड फैकल्टी भर्ती प्रक्रिया शामिल है, जिसके तहत 150 पदों पर भर्ती करने की योजना है। इसके अलावा, हैकाथॉन और ओलंपियाड के माध्यम से छात्रों को प्रवेश के नए अवसर भी उपलब्ध कराए गए हैं।
संस्थान का छात्र उद्यमिता कार्यक्रम युवाओं को अपने स्टार्टअप स्थापित करने के लिए सहयोग देगा। इसके अंतर्गत रक्षा एवं एयरोस्पेस, चिकित्सा प्रौद्योगिकी (MedTech), स्वच्छ प्रौद्योगिकी (CleanTech) और कृषि प्रौद्योगिकी (AgriTech) जैसे विविध क्षेत्रों में काम करने वाले युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
- फ्रंटियर: अत्याधुनिक अनुसंधान को वास्तविक उपयोग से जोड़ना
फ्रंटियर स्तंभ का उद्देश्य बुनियादी अनुसंधान को अनुप्रयुक्त अनुसंधान और वास्तविक दुनिया में उसके उपयोग से जोड़ना है। इसके प्रमुख क्षेत्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, ड्रोन, चिकित्सा प्रौद्योगिकी और सस्टैनबिलिटी हैं।
इस स्तंभ के लिए ₹1,000 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसे पार करते हुए अब तक ₹1,556 करोड़ की प्रतिबद्धता प्राप्त हो चुकी है।
इस पहल के तहत कई महत्त्वपूर्ण अनुसंधान एवं विकास सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। इनमें क्वांटम प्रौद्योगिकी केंद्र शामिल है, जिसकी परिकल्पना देश में ऐसा पहला केंद्र बनाने के रूप में की गई है, जहां क्वांटम हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का विकास एक ही स्थान पर किया जा सकेगा।
भारत में चिप असेंबली और परीक्षण संयंत्रों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सेमीकंडक्टर पैकेजिंग उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence for Semiconductor Packaging) स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा, चिकित्सा उपकरणों के प्रोटोटाइप निर्माण एवं परीक्षण के लिए एक विशेष सुविधा विकसित की जाएगी। यह पहल ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है, जब भारत अपने उच्चस्तरीय चिकित्सा उपकरणों की लगभग 80 प्रतिशत आवश्यकता आयात के माध्यम से पूरी करता है।
इसके अतिरिक्त, कैंसर, मेटाबॉलिक और न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के उपचार से संबंधित अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए औषधि खोज (Drug Discovery) कार्यक्रम भी विकसित किया जाएगा।
ये पहलें आईआईटी कानपुर में पहले से हो रहे ऐसे अनुसंधान पर आधारित हैं, जिनका वास्तविक दुनिया में उपयोग किया जा रहा है। संस्थान द्वारा विकसित कृत्रिम बुद्धिमत्ता इंजन भारत सरकार की केंद्रीयकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) को शक्ति प्रदान करता है। संस्थान के साइबर सुरक्षा शोधकर्ता भिलाई इस्पात संयंत्र में सुरक्षा संचालन केंद्र (Security Operations Centre) संचालित कर रहे हैं। वहीं, संस्थान के संकाय सदस्यों से जुड़े स्टार्टअप्स ने भारी पेलोड ले जाने वाले लॉजिस्टिक्स ड्रोन और स्ट्राइक ड्रोन भी विकसित किए हैं।
श्री राजनाथ सिंह, माननीय रक्षा मंत्री, ने कहा: महान संस्थानों के निर्माण में दशकों का समय लगता है। आईआईटी की स्थापना करने और उन्हें सशक्त बनाने वाली शुरुआती पीढ़ियों ने सीमित संसाधनों के बावजूद असाधारण प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया। उन्होंने केवल परिसर और प्रयोगशालाएँ ही नहीं बनाईं, बल्कि उत्कृष्टता, सेवा और राष्ट्र-निर्माण की एक सशक्त संस्कृति भी विकसित की। इस विरासत को आगे बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है। एक पीढ़ी नींव रखती है, अगली पीढ़ी उसे और मजबूत करती है, और उसके बाद आने वाली पीढ़ियाँ उसी विरासत के आधार पर नई ऊँचाइयाँ हासिल करती हैं। इसी तरह संस्थान समय के साथ अपनी पहचान और प्रासंगिकता बनाए रखते हैं तथा एक पीढ़ी की उपलब्धियाँ अगली पीढ़ी के लिए नई शुरुआत का आधार बनती हैं।
आईआईटी कानपुर का यह अभियान संस्थान को ऐसे भविष्य के लिए तैयार करने का अवसर प्रदान करता है, जहाँ वैज्ञानिक खोज, तकनीकी नवाचार और राष्ट्रीय विकास एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हों। इस अभियान की सफलता का वास्तविक आकलन इससे होगा कि यह प्रयास कितनी प्रतिभाओं को निखारता है, ज्ञान के क्षेत्र को कितना आगे बढ़ाता है, नई तकनीकों के विकास में कितना योगदान देता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए कितने नए अवसर सृजित करता है।
प्रो. मणींद्र अग्रवाल, निदेशक, आईआईटी कानपुर ने कहा: “आईआईटी कानपुर जिस भविष्य के निर्माण का संकल्प ले रहा है, वह हममें से किसी एक व्यक्ति से कहीं बड़ा है। यह उन युवा भारतीयों में निवेश है, जो देश का भविष्य गढ़ेंगे। हमारे लक्ष्य की लगभग आधी राशि की प्रतिबद्धता अभियान की औपचारिक घोषणा से पहले ही प्राप्त हो गई थी। यह इस बात का प्रमाण है कि हमारे दानदाताओं को संस्थान की कार्यप्रणाली और उज्ज्वल भविष्य पर विश्वास है।
भारत अपने भविष्य को परिभाषित करने वाली प्रौद्योगिकियों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रह सकता। हमें इन तकनीकों का विकास स्वयं करना होगा। भविष्य की डीप-टेक कंपनियां केवल गैरेज में नहीं, बल्कि प्रयोगशालाओं में भी जन्म लेंगी, उसी दिशा में जी-साइन ऐसे उद्यमियों को तैयार करेगा, जो इन कंपनियों और नवाचारों का नेतृत्व करेंगे।
यह अभियान आईआईटी कानपुर के प्रत्येक पूर्व छात्र, भागीदार और शुभचिंतक के लिए संस्थान के अगले अध्याय को लिखने में योगदान देने का आमंत्रण है। यहां किया गया प्रत्येक योगदान एक स्पष्ट उद्देश्य से जुड़ा है—चाहे वह किसी स्कूल, अनुसंधान सुविधा, फैकल्टी चेयर या किसी विशेष कार्यक्रम के लिए हो।”
आईआईटी कानपुर के बारे में
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (IIT Kanpur) की स्थापना वर्ष 1959 में हुई थी। भारत सरकार द्वारा इसे राष्ट्रीय महत्त्व के संस्थान (Institute of National Importance) का दर्जा प्राप्त है। विज्ञान, इंजीनियरिंग और बहुविषयक शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रतिष्ठित आईआईटी कानपुर का परिसर 1,050 एकड़ में फैला है। संस्थान में 20 विभाग, 27 केंद्र, तीन अंतर्विषयक कार्यक्रम और तीन विशिष्ट स्कूल हैं। 570 से अधिक संकाय सदस्यों और 9,500 से अधिक विद्यार्थियों वाला यह संस्थान नवाचार, अनुसंधान और समग्र विकास के क्षेत्र में निरंतर अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
अधिक जानकारी के लिए देखें: www.iitk.ac.in