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आईआईटी कानपुर ने मनाया 67वां स्थापना दिवस, संस्थान की उपलब्धियों और योगदान को किया याद

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आईआईटी कानपुर ने मनाया 67वां स्थापना दिवस, संस्थान की उपलब्धियों और योगदान को किया याद

Kanpur , 2 November 2026

Source: Information and Media Outreach Cell, IIT Kanpur

~ आईआईटी खड़गपुर के पूर्व निदेशक प्रो. पार्थ प्रतिम चक्रवर्ती मुख्य अतिथि के रूप में समारोह में शामिल हुए।

~ चार श्रेणियों में कुल 23 लोगों को सम्मानित किया गया। इनमें इंस्टीट्यूट फेलो, विशिष्ट पूर्व छात्र, सत्येंद्र के. दुबे मेमोरियल और यंग एलुमनाई पुरस्कार शामिल हैं।

कानपुर, 2 नवंबर 2026: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी कानपुर) ने 2 नवंबर 2026 को अपना 67वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर संस्थान की अब तक की यात्रा और उपलब्धियों को याद किया गया। साथ ही, संस्थान के पूर्व छात्रों, शिक्षकों और शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों के योगदान को भी सम्मानित किया गया। समारोह का आयोजन आईआईटी कानपुर के मुख्य सभागार में किया गया। इसमें आईआईटी खड़गपुर के पूर्व निदेशक और कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग (Department of Engineering) के प्रोफेसर, प्रो. पार्थ प्रतिम चक्रवर्ती मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

स्थापना दिवस समारोह में आईआईटी कानपुर के शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी और पूर्व छात्र एक साथ नजर आए। इस अवसर पर शिक्षा, शोध, जनसेवा और अन्य क्षेत्रों में अपने काम से पहचान बनाने वाले कुल 23 लोगों को चार श्रेणियों में सम्मानित किया गया। इनमें इंस्टीट्यूट फेलो अवार्ड, विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार, सत्येंद्र के. दुबे मेमोरियल पुरस्कार और यंग एलुमनाई अवार्ड शामिल रहे।

अपने स्वागत संबोधन में आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मणीन्द्र अग्रवाल ने संस्थान की गौरवशाली विरासत का उल्लेख करते हुए अनुसंधान, शिक्षा और प्रौद्योगिकी विकास के क्षेत्र में इसकी उपलब्धियों को और आगे ले जाने का अपना दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा, “आईआईटी कानपुर के 67वें स्थापना दिवस के अवसर पर हम उस गौरवशाली विरासत पर गर्व का अनुभव करते हैं, जिसे हमारे शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों की पीढ़ियों के योगदान से आकार मिला है। हमारा विशेष ध्यान प्रौद्योगिकी विकास को गति देने, विश्वस्तरीय मौलिक अनुसंधान को सुदृढ़ करने, भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शैक्षणिक परिवेश को विकसित करने पर है। हम ऐसे वातावरण के निर्माण की ओर कार्यरत हैं, जो बौद्धिक जिज्ञासा को प्रोत्साहित करे, प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और शिक्षकों को उत्कृष्ट अवसर एवं सहयोग प्रदान करे तथा विभिन्न विषयों के बीच परस्पर सहयोग को बढ़ावा दे। हाल ही में ‘ग्रेटर दैन अस’ (Greater Than Us) अभियान का प्रारंभ हुआ है, जिसके अन्तर्गत एक अरब अमेरिकी डॉलर की राशि जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल के माध्यम से हमारा उद्देश्य संस्थान की अनुसंधान, शैक्षणिक और प्रौद्योगिकी विकास संबंधी क्षमताओं को और अधिक सशक्त बनाने के लिए आवश्यक संसाधन एवं सहयोग जुटाना है। हमारा दायित्व केवल अब तक अर्जित उपलब्धियों और विरासत को संजोकर रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्देश्यपूर्ण प्रयासों और दूरदर्शी सोच के साथ इसे निरंतर आगे बढ़ाना भी है।”

मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में आईआईटी खड़गपुर के पूर्व निदेशक प्रो. पार्थ प्रतिम चक्रवर्ती ने आईआईटी कानपुर को 67वें स्थापना दिवस की बधाई दी। उन्होंने देश में इंजीनियरिंग शिक्षा और वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में संस्थान के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा, “आईआईटी कानपुर एक अग्रणी संस्थान है और स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। पिछले कई वर्षों में यहां के शिक्षकों ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यहां पढ़ाई के साथ शोध, नए विचारों और रचनात्मकता को भी बढ़ावा दिया जाता है। इस मामले में संस्थान की शिक्षा व्यवस्था दुनिया के बेहतरीन संस्थानों के बराबर है। संस्थान के कर्मचारियों की मेहनत और विद्यार्थियों तथा पूर्व छात्रों की उपलब्धियों ने भी इसकी पहचान बनाने में अहम भूमिका निभाई है। ऐसे संस्थान कई पीढ़ियों की सोच, मेहनत और समर्पण से बनते हैं। मैं आईआईटी कानपुर और सभी इंस्टीट्यूट फेलो, विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार विजेताओं तथा अन्य सम्मानित लोगों को हार्दिक बधाई देता हूं। मेरी कामना है कि संस्थान इसी तरह आगे बढ़ता रहे, युवाओं को प्रेरित करे, नए ज्ञान को बढ़ावा दे और समाज तथा देश के विकास में योगदान देता रहे।”

इंस्टीट्यूट फेलो पुरस्कार प्रो. इंद्रनील मन्ना और प्रो. वी. चंद्रशेखर को दिया गया। उन्हें क्रमशः पदार्थ विज्ञान (Material Science) और रसायन विज्ञान (Chemistry) के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार शिक्षा, शोध और समाज के लिए किए गए विशेष कार्यों को सम्मान देने के लिए दिया जाता है।

विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार के तहत 15 पूर्व छात्रों को सम्मानित किया गया। इन सभी ने अलग-अलग क्षेत्रों में अपने काम और उपलब्धियों से आईआईटी कानपुर का नाम रोशन किया है। पुरस्कार पाने वालों में प्रो. प्रकाश पनांगडेन, प्रो. उपमन्यु लाल, प्रो. रवि आहूजा, प्रो. हरीश चंद्र वर्मा, डॉ. पंगनमाला विजय कुमार, प्रो. दीपेंद्र प्रसाद, डॉ. जोसुला रामचंद्र राव, श्री रवि अग्रवाल, श्री लोकवीर कपूर, डॉ. तुषार दीपक चंद्रा, प्रो. संजय ई. सरमा, डॉ. विज्ञान सिंघल, डॉ. सतीश चंद्र, श्री रजत वर्मा और श्री अभिषेक विनोद सिंह शामिल हैं।

सत्येंद्र के. दुबे मेमोरियल पुरस्कार, आईआईटी कानपुर के सिविल एवं पर्यावरण अभियांत्रिकी विभाग (Engineering Department) के पूर्व प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष स्वर्गीय डॉ. गुरु दास अग्रवाल और लखनऊ के पुलिस उप महानिरीक्षक श्री बबलू कुमार को दिया गया। यह पुरस्कार ईमानदारी, अपने काम के प्रति निष्ठा और मानवीय मूल्यों को बनाए रखने के लिए उनके योगदान के सम्मान में दिया गया।

यंग एलुमनाई पुरस्कार प्रो. अनिंद्य डे, डॉ. नितीश श्रीवास्तव, प्रो. फैज अहमद और श्री निखिल कुरेले को दिया गया। उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में किए गए अच्छे काम और उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।

इस समारोह में आईआईटी कानपुर की 67 वर्षों की गौरवशाली यात्रा के साथ-साथ उन सभी पीढ़ियों के योगदान, समर्पण और अथक प्रयासों को भी स्मरण किया गया, जिन्होंने अपने सामूहिक प्रयासों से संस्थान को आज इस प्रतिष्ठित मुकाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कार्यक्रम के अंत में आईआईटी कानपुर के कुलसचिव, श्री विश्व रंजन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इसके पश्चात राष्ट्रगान के साथ समारोह का औपचारिक समापन हुआ।

आईआईटी कानपुर के बारे में

1959 में स्थापित, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। विज्ञान और इंजीनियरिंग शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध, आईआईटी कानपुर ने अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसका 1,050 एकड़ का हरा-भरा परिसर शैक्षणिक और अनुसंधान संसाधनों से समृद्ध है। संस्थान में 21 विभाग, 27 केंद्र, तीन अंतर्विषयी कार्यक्रम और तीन विशेष स्कूल हैं, जो इंजीनियरिंग, विज्ञान, डिजाइन, मानविकी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को समाहित करते हैं। 580 से अधिक पूर्णकालिक फैकल्टी और 9,500 से अधिक छात्रों के साथ, आईआईटी कानपुर नवाचार, अनुसंधान और समग्र विकास में अग्रणी बना हुआ है।

अधिक जानकारी के लिए विज़िट करें: www.iitk.ac.in